जेलों का सिग्नेचर ट्यून- जेलों को जोड़ती तिनका तिनका कोशिश

अल्फ़ाज़ों के कैदी की
कोरे पन्नों पर रिहाई है
दर्द छुपा था जो बरसों से
वो स्याही आज उभर आई है।
-अज्ञात

जेल का रेडियो,इसका एक पॉडकास्ट् और उस पर एक सिग्नेचर ट्यून- ये सारे अजूबे जिस नाम और काम से जुड़े हैं, उसका नाम है तिनका तिनका जेल रेडियो। तिनका तिनका फाउंडशेन के द्वारा संचालित तिनका जेल रेडियो एकमात्र ऐसा रेडियो है जो बंदियो को सशक्त बनाने का काम कर रहा है। 2023 में तिनका जेल रेडियो के सिग्नेचर ट्यून को जेल के ही बंदियों ने बनाया।

असल में तिनका तिनका फाउंडेशन ने भारत की जेलों में रेडियो लाने का एक विशेष काम किया है। इसकी संस्थापक डॉ. वर्तिका नन्दा ने जिला जेल, आगरा, हरियाणा और उत्तराखंड की जेलों में रेडियो स्थापित किया है। यह रेडियो जेल के अंदर ही संचालित होता है लेकिन बाहर के लोगों को बंदियों के सृजन से कैसे जोड़ा जाए,यह सोचकर तिनका तिनका ने तिनका जेल रेडियो की शुरुआत की।

इसी तिनका तिनका जेल रेडियो का सिग्नेचर ट्यून अपने आप में ही एक अद्भुद भाव रखता है। इस धुन के हर एक पंक्ति में एक गहन भाव छुपा है जो इन बंदियों के जीवन में गहरा प्रभाव डालता है। इस गीत को डॉक्टर सूचित नारंग ने ही लिखा है और गाया है और उनका साथ रोहित वर्मा और वरुण ने दिया है।ये तीनो ही जेल में बंद है।

अब सवाल ये उठता है कि तिनका तिनका आखिर है क्या?

कहानी तिनका तिनका के शुरुआत की
तिनका तिनका डॉक्टर वर्तिका नंदा द्वारा प्रारम्भ की गई एक ऐसी पहल है जो बंदियों के जीवन में रंग भरने का काम कर रही है। यह पहल इन जेल में मौजूद बंदियों के मानसिक तनाव और अवसाद को कम करने में मदद कर रही है। तिनका तिनका की बड़े स्तर पर पहली चर्चा 2013 में इनकी किताब तिनका तिनका तिहाड़ की वजह से सुनने को मिली। उसके बाद तिनका तिनका डासना और तिनका तिनका मध्य प्रदेश भी प्रकाशित हुईं। उसके बाद 2019 में तिनका तिनका ने जेलों में रेडियो स्थापित करने की मुहिम शुरू की.

देहरादून में जेल रेडियो की स्थापना से सिग्नेचर ट्यून बनने तक का सफ़र
11 अप्रैल, 2021 को डॉक्टर वर्तिका नंदा द्वार रचित एक आलेख,जिसका शीर्षक था ‘सलाखों में रंग भरता रेडियो’ दैनिक जागरण में प्रकाशित हुआ था। देहरादून जेल के जेलर श्री पवन कोठारी ने यह आलेख पढ़कर डॉक्टर वर्तिका नंदा को संपर्क किया। उन्होने यह इच्छा जताई कि देहरादून जेल में भी जेल रेडियो की स्थापना की जाए।

सभी सरकारी प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के बाद जेल के 14 बंदियों की एक टीम बनाई गई और इस नीव को सफल बनाने के लिए ट्रेनिंग प्रदान की गई।इनही बंदियों में एक नाम है डॉक्टर सुचित नारंग। जेल में आने से पहले भी सुचित संगीत के जानकार थे लेकिन जेल में आने के बाद मौके मिलने का हो गए। कमाल की बात यह है कि इन्होनें नेत्रहीन होने के बाद भी देहरादून जेल रेडियो की कमान संभाल रखी है। वे कहते हैं कि जेल के ही दो बंदी, अरुण और रोहित उनकी आंखें हैं। 31 मई 2023 को तिनका तिनका जेल रेडियो का सिग्नेचर ट्यून लॉन्च हुआ जो कि सुचित नारंग द्वार लिखा और गाया गया है। इस कार्य को पूरा होने तक अरुण और रोहित डॉक्टर सुचित नारंग के साथ नल-नील की तरह खड़े रहे।

सिग्नेचर ट्यून संगीत भाव स्पष्ट
सुचित नारंग द्वारा रचित इस गीत में बेहद गहरा भाव छुपा है। यह गीत केवल किसी एक का नहीं बल्कि कारागार में मौजूद हजारों बंदियों के दिलों में मौजूद तिनका तिनका जेल रेडियो के भाव को प्रकट करता है।
पहली पंक्ति ‘एक डूबते को तिनके का सहारा मिल गया’ में एक अद्भुत अनुभव छुपा है,जो सिखाता है कि इस कठिनाई भरे जीवन के सफ़र में किसी भी माध्यम की सहायता से मनुष्य समृद्धि की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।
अगली पंक्ति तिनका तिनका मिलकर एक आसरा बन गया’ का भाव बेहद सरल है कि छोटे-छोटे कदम बढ़ा कर भी बड़े सपने साकार किए जा सकते हैं। जो यह जेल के बंदी शालीनता से कर भी रहे हैं।
‘बिगाडी सिमटी आवाज़ों को एक हमसफर मिल गया’ इस पंक्ति का अर्थ है तिनका तिनका जेल रेडीयो ने इन बंदियों की बिगाडी सिमटी अर्थात घबराई हुई, निराश और हताश अवाज़ों को एक मंच दिया है।
आखरी पंक्ति ‘निराशाओं मे आशा का एक दीपक जल गया’ का भाव है कि तिनका तिनका ने इन उदासी और मानसिक तनाव में जी रहे बंदियों के जीवन मे आशा, प्रेम और समृद्धी का दीपक जला रहा है।

दिल से ज़ुबाँ तक

इस पूरी यात्रा को समझने के लिए तिनका जेल रेडियो के एपिसोड 65 की यह पंक्तियां पढ़ी जा सकती हैं-

Tinka Jail Radio|Main Hoon Tinka|Signature Tune and vibes Episode 65: Bites: सूचित जी, क्या हुआ,कहां से समान मंगाया और कैसे यह यात्रा आगे बढ़ी…”जब तिनका तिनका फाउंडेशन की और से ये पता चला कि तिनका तिनका की सिग्नेचर ट्यून को बनाया जा रहा हैं, हम लोग भी बहुत एक्साइटेड थे। इसको कंपोज करते समय और इसके लिरिक्स बनाते समय मुझे सबसे पहले ये ध्यान था कि तिनका तिनका के वजूद को जेल की खिड़की की आवाज से गाते हुए कैसे दुनिया के सामने लाया जाए और उस चीज को अपने जहन और ध्यान में रखते हुए मैंने ये कोशिश की। जो इंस्ट्रूमेंट्स हमारे पास मौजूद नहीं थे जैसे इलेक्ट्रॉनिक तबला, इलेक्ट्रॉनिक तानपुरा ऐसे कुछ इंस्ट्रूमेंट्स को मैंने अपने घर से जेलर साहब की परमिशन से मंगवाया और हमने इस काम को आगे बढ़ाया।”
link:https://youtu.be/L19FMAoUcME?si=mql_EppDG31K4Bcn
अरुण के लिए जेल रेडियो के क्या मायने हैं?
“जिदंगी का सफर भी अकेला है, ये दुनिया भी मेला है। इस भीड़ में रेंज गए है सब रास्ते, ये इम्तहान भी पहला है, ये इम्तहान भी पहला है। दून रेडियो स्थापित होने से पहले मैं इस कारागार में रोजमर्रा के कार्य ही किया करता था, जैसे ही दून जेल रेडियो बना तो मुझे मेरे मन मुताबिक काम करने की पूरी आजादी ही मिल गई, क्योंकि इसमें मुझे एक पंथ दो काज नजर आए और यहां पर रह रहे सभी बंदी साथी मानसिक अवसाद और तनाव से ग्रस्त थे। इसलिए उन्हें खुशियां देते हुए मेरे चेहरे पर भी एक मुस्कुराहट आ गई और मानों जैसे मुझे मेरी खुशी मिल गई।”
LINK:https://youtu.be/3lUvEzc8jN0?si=MbybqbGNLknmIgEb

अंततः
यह डॉक्टर वर्तिका नंदा की सोच और दृढ़ परिश्रम ही है जिसने इस अद्भुद पहल को साकार रूप मे उतारा है। साथ ही जेल के बंदियों ने काफ़ी रुचि दिखाई और बढ़-चढ़ कर भाग लिया जो इसे सफ़ल बना रहा है। एपिसोड 65 के एक हिस्से में डॉ. वर्तिका नन्दा कहती हैं- भले ही इस सिग्नेचर ट्युन को बनाने के लिए कुछ वाद्य यंत्र बाहर से आए हो लेकिन इसे बनाने की प्रेरणा इन बंदियों के भीतर से आई थी।

यह जानकर अश्चर्य नहीं होना चाहिए कि इस जेल रेडियो के श्रोता अधिकतर जेल मे मौजूद बंदी ही हैं।
इस भीड़ भरे जीवन मे लोगों के पास वक्त नहीं कि वो इन कर्यक्रमों को सुन सकें। तमाम चुनौतियों के बावजूद तिनका तिनका बिना किसी आर्थिक सहयोग के जेलों को आपस में जोड़ने की मुहिम में जुटा है।

संदर्भ:
YouTube Handle: Vartika Nanda
https://youtube.com/@vartikananda76?si=zCYwSwyWcnnTRZgd

YouTube Handle:Tinka Tinka
https://youtube.com/@tinkatinkaprisonreforms4559?si=-Axr9qyHvoMgUDY9

Episode Links
Episode65: Main Hoon Tinka|Signature Tuneandvibes:https://youtu.be/L19FMAoUcME?si=mql_EppDG31K4Bcn
Episode77: Music in Jail|From Haryana to Uttarakhand
https://youtu.be/dsL1Ddq7q8c?si=s6Ye0pPB6kqELDHk

Websites
VartikaNanda:https://vartikananda.com/15-2/
Tinka Tinka: https://tinkatinka.org/

Lakshmi Priya Ghosh and Yogita Mishra, students of the Department of Journalism, Lady Shri Ram College have written this article for Tinka Tinka Prison Research Cell

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